इन ‘अन्नदाताओं’ ने ‘तिरंगा’ की आड़ में जो खेल खेला है, उसे देशवासी कभी माफ नहीं कर पाएंगे। उन्होंने गणतंत्र दिवस पर केवल ‘गण’ को ही ध्वस्त नहीं किया बल्कि ‘तंत्र’ को भी तार-तार कर दिया। जय जवान, जय किसान और तिरंगा की शान की आड़ में उन्होंने भारत के सम्मान को रौंदने के साथ अपने स्वाभिमान को भी मिट्टी में मिला दिया।
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