लेकिन इस बार के अमेरिकी चुनाव में बहुत सी ऐसी तथ्यात्मक बातों का खुलासा भी हुआ है जिसके लिए अमेरिका अभी तक दुनिया का सरताज बना हुआ है, कहलाता रहा है। मसलन जाति-धर्म, रंग-नस्ल, पंथ-संप्रदाय जैसी तमाम मानवीय कमतरियों से ऊपर उठ चुके समाज के रूप में अमेरिका की जो पहचान थी, वह इस बार के चुनाव परिणाम के बाद धूमिल होती नजर आ रही है। इस बार के चुनाव में अमेरिका में जिस तरह से वोटिंग हुई है उससे साफ है कि अब अमेरिका भी स्थानीय-बाहरी, श्वेत-अश्वेत, ग्रेजुएट-नॉन ग्रेजुएट जैसे मसलों से जूझता दिखने लगा है। आने वाले वक्त में निश्चित तौर पर इस तरह के मुद्दे और बढ़ेंगे जिससे अमेरिका की दुनिया के समक्ष बनी छवि का और धूमिल होना तय है।
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