कामाख्या मंदिर के बारे में सबसे दिलचस्प बात क्या है, जिसे सुनकर आपके होश उड़ जायें? 26-09-2020

वैसे तो हिंदू धर्म में बहुत सारी दिलचस्प बातों से भरा है परंतु जब मैंने पहली बार यह सुनी की भारत में ऐसा भी मंदिर है जहां पर माता की योनि की पूजा की जाती है

तब यह सुनकर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ था और तब से ही मैं इस मंदिर के बारे में जानना चाहती थी कि क्या कारण है इसके पीछे का इतिहास का क्या रहा है जिसके कारण यहां पर माता की योनि की पूजा की जाती है लेकिन जब मैंने इस मंदिर के बारे में पढ़ा और यह पता चला कि क्या कारण है कि यहां पर माता के योनि की पूजा की जाती है उस समय मेरी आंख नम हो गई क्योंकि यह पहली बार था जब मैं भगवान शिव और माता सती के प्रेम के बारे में पढ़ रही थी बहुत बुरा भी लग रहा था की शंकर जी माता सती को लेकर जा रहे थे और माता सती का एक-एक अंग जलकर गिर रहा था

उस स्थान को आज कामाख्या देवी मंदिर के नाम से जानते हैं जो कि असम में है और जो की तंत्र सिद्धि मंत्र सिद्धि और बांझ औरतों के लिए एक वरदान स्वरुप है तो चलिए मैं आपको आज माता के बारे में उनके मंदिर के बारे में कुछ दिलचस्प बातें बताती हूं

* कामाख्या देवी को बहते हुए खून की देवी भी कहा जाता है यहां देवी के गर्भ और योनि को मंदिर के गर्भगृह में रखा गया है जिसमें जून के महीने में रक्त का प्रवाह होता है। यहां के लोगों में मान्यता है की इस दौरान देवी अपने मासिक चक्र में होती है और इस दौरान यहां स्थित ब्रह्मपुत्र नदी लाल हो जाती है।

* मंदिर में देवी शक्ति की कोई मूर्ति नहीं है। जब आप इस मंदिर में प्रवेश करेंगे तो वहां आपको देवी के मंदिर के अंदर योनि नुमा संरचना दिखेगी। इस संरचना को देवी शक्ति की योनि के रूप में पूजा जाता है।

* विश्व के सभी तांत्रिकों, मांत्रिकों एवं सिद्ध-पुरुषों के लिये वर्ष में एक बार पड़ने वाला अम्बूवाची योग पर्व वस्तुत एक वरदान है।

*मंदिर की एक अन्य विशेषता यह है कि जब मां कामाख्या रजस्वला होती हैं तो जलकुंड में पानी की जगह खून बहता है।

* मंदिर का कपाट बंद होने से पहले यहां एक सफेद कपड़ा बिछाया जाता है और जब कपाट खुलता है तो यह कपड़ा बिल्कुल लाल रहता है।

*कामाख्या देवी का मंदिर पशुओं की बलि देने के लिए भी प्रसिद्ध् है लेकिन एक खासियत यह भी है कि यहां मादा पशुओं की बलि नहीं दी जाती है।

देवी के 51 शक्तिपीठों में से यह भी एक है। माना जाता है कि भगवान विष्णु ने जब देवी सती के शव को चक्र से काटा तब इस स्थान पर उनकी योनी कट कर गिर गयी

*माना जाता है कि यहां के तांत्रिक बुरी शक्तियों को दूर करने में भी समर्थ होते हैं। हालांकि वह अपनी शक्तियों का इस्तेमाल काफी सोच-विचार कर करते हैं। कामाख्या के तांत्रिक और साधू चमत्कार करने में सक्षम होते हैं। कई लोग विवाह, बच्चे, धन और दूसरी इच्छाओं की पूर्ति के लिए कामाख्या की तीर्थयात्रा पर जाते हैं।

*अगर कोई व्यक्ति काला जादू से ग्रसित है तो वह यहां आकर इस समस्या से निजात पा सकता है।

*पोहन बिया, पूस के महीने में देवी कामेश्वरी और देवता कामेश्वर के बीच हर साल एक प्रतीकात्मक शादी कराई जाती है। फाल्गुन के महीने में आप दुर्गा देउल को कामाख्या में देख सकते हैं।

* माना जाता है कि बांझ औरतों के लिए यह मंदिर बहुत ही लाभकारी है यहां पर बहुत से महिला जो की मां नहीं बन सकती थी उनकी मुरादें पूरी होती है और उन्हें मां बनने का सुख प्राप्त होता है

. माता जी का मंत्र :-

योनि मात्र शरीराय कुंजवासिनि कामदा।

रजोस्वला महातेजा कामाक्षी ध्येताम सदा॥

शरणागतदिनार्त परित्राण परायणे ।

सर्वस्याति हरे देवि नारायणि नमोस्तु ते ।।


*कामाख्या के बारे में किंवदंती है कि घमंड में चूर असुरराज नरकासुर एक दिन मां भगवती कामाख्या को अपनी पत्नी के रूप में पाने का दुराग्रह कर बैठा था। कामाख्या महामाया ने नरकासुर की मृत्यु को निकट मानकर उससे कहा कि यदि तुम इसी रात में नील पर्वत पर चारों तरफ पत्थरों के चार सोपान पथों का निर्माण कर दो एवं कामाख्या मंदिर के साथ एक विश्राम-गृह बनवा दो, तो मैं तुम्हारी इच्छानुसार पत्नी बन जाऊँगी और यदि तुम ऐसा न कर पाये तो तुम्हारी मौत निश्चित है। गर्व में चूर असुर ने पथों के चारों सोपान प्रभात होने से पूर्व पूर्ण कर दिये और विश्राम कक्ष का निर्माण कर ही रहा था कि महामाया के एक मायावी कुक्कुट (मुर्गे) द्वारा रात्रि समाप्ति की सूचना दी गयी, जिससे नरकासुर ने क्रोधित होकर मुर्गे का पीछा किया और ब्रह्मपुत्र के दूसरे छोर पर जाकर उसका वध कर डाला। यह स्थान आज भी `कुक्टाचकि' के नाम से विख्यात है। 

                                                                                                                         -कोमल सिंह धाकड़

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