जालौन। ‘सुरभि संदेश’ की पाठिका, जो ‘सुरभि संदेश’ की प्रशंसिका भी हैं साथ ही लेखन में भी रूचि रखती हैं। लेकिन उचित माध्यम न मिलने से वह उसका प्रर्दशन नहीं कर पा रही थीं। ‘सुरभि संदेश’ को जब यह जानकारी मिली तो ‘सुरभि संदेश’ टीम ने उनसे संपर्क किया और उनसे विचार साझा किए। ‘सुरभि संदेश’ समय समय पर उनकी रचनाओं को आपके समझ प्रस्तुत करेगा।
नगर में कई महिलाओं के नाम याद आते हैं जो समाज के लिए कुछ अच्छा करने का प्रयास कर रहीं हैं। इनमें सर्वप्रथम जो नाम सामने आता है वह भाजपा महिला मोर्चा की नगर अध्यक्ष ‘निशा माहेश्वरी’ जिन्होंने लाॅक डाउन के समय गरीबों व निर्धन तबके के व्यक्तियों के हित में सराहनीय कार्य किया है। दूसरा नाम आता है कन्हैयालाल अग्रवाल मैमोरियल बाल विद्या मंदिर की संचालिका खुशबू अग्रवाल जो नगर पालिका सदस्य भी हैं वह प्रतिवर्ष सर्दी के मौसम में गरीबों व निर्धन तबके के लोगों को वस्त्रों का वितरण करती हैं।
इसके अतिरिक्त नेहा साहनी जो मुंबई में रहकर माॅडलिंग व एक्टिंग में सफलता अर्जित कर रही हैं। एक बेटी भी है जो कुछ कर गुजरने का जज्बा दिखता है। वह हैं आनंदी बाई बालिका इंटर काॅलेज की प्रधानाचार्या सुनीता शर्मा की बेटी अपराजिता शर्मा। वर्तमान में शिक्षा प्राप्त कर रही अपराजिता शर्मा जिस आत्म विश्वास से अपनी बात रखती है वह वाकई काबिले तारीफ है। क्योंकि जहां लोग मंच पर खड़े होने से झिझकते नजर आते हैं। वह बेबाकी से मंच साझा करती है। यही कारण है वह अभी तक कई पुरस्कार भी प्राप्त कर चुकी है।
इसके अतिरिक्त भी और नाम हो सकते हैं जो लेखक की जानकारी में नहीं हैं। यदि कोई ऐसी महिला अथवा युवती है जो किसी भी प्रकार से अन्य महिलाओं अथवा युवतियों के लिए प्रेरणा बन सकती है तो हमें अवश्य अवगत कराएं। ताकि उसकी कहानी को सामने लाया जा सके और अन्य उससे प्रेरणा पा सकें।
फिलहाल हम बात कर रहे हैं ‘चारू शिवहरे’ की। चारू शिवहरे से हुई बातचीत के क्रम मंे उन्होंने बताया कि बचपन से ही परिवार का माहौल साहित्यक रहा है। विभिन्न साहित्य की पुस्तकें घर में उपलब्ध रहती थीं। उन पुस्तकों में छपे नामों को देखकर उन्हें भी लगा कि उनका भी नाम छपना चाहिए। इस प्रकार लेखन की शुरूआत हुई। शुरूआत छोटी छोटी कविताओं से हुई। जिन्हें वह घर पर अपनी मां व बहनों को सुनाती थीं। उन्होंने हमेशा उत्साहवर्धन किया। लिखने की शुरूआत तो हो गई लेकिन लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए इसकी चिंता बनी रही। कोई उचित माध्यम न मिलने से रचनाएं बस इकट्ठा होती रहीं। तभी एक बार उनकी नजर ‘सुरभि संदेश’ पर पड़ी जिसमें महिलाओं के विचारों को स्थान दिया जाता था। तब उन्हें उम्मीद हुई कि जो मेहनत वह कर रही हैं उसका परिणाम अब मिलने वाला। अब ‘सुरभि संदेश’ में स्थान पाकर वह काफी खुश हैं।