किवदंती हैं कि भीम के पुत्र घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक जिसे बुंदेलखंड में भौमासुर भी कहते हैं, को महाभारत का युद्ध देखने आते समय झिंझिया को देखते ही प्रेम हो गया। जब झिंझिया ने विवाह का प्रस्ताव रखा तो उन्होंने युद्ध से लौटकर झिंझिया को विवाह का वचन दिया। लेकिन अपनी मां को दिए वचन, कि हारने वाले पक्ष की तरफ से वह युद्ध करेंगे, के चलते वह कौरवों की तरफ से युद्ध करने आ गए और श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से उनका सिर काट दिया। वरदान के चलते सिर कटने के बाद भी वह जीवित रहे और उन्होंने अपने कटे सिर से महाभारत का युद्ध देखा। युद्ध के बाद मां ने विवाह के लिए मना कर दिया। इस पर बर्बरीक ने जल समाधि ले ली। झिंझिया उसी नदी किनारे टेर लगाती रही लेकिन वह लौट कर नहीं आए। इस तरह एक प्रेम कहानी का अंत हो गया।
पूरा पढ़ेंसभी अकीदतमंद पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब का जन्म दिवस अपने घरों और मोहल्लों को सजाकर व रोशन कर मनाएं। घरों में चरागां करें और घरों व मस्जिदों में बैठकर इबादत करें।
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पूरा पढ़ेंकाशी (बनारस) का वह श्मसान घाट जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां चिता पर लेटने वाले को सीधे मोक्ष मिलता है। काशी के 84 घाटों में सबसे चर्चित इस घाट का नाम है मणिकर्णिका घाट। मणिकर्णिका घाट दुनियां का इकलौता श्मसान है, जहां चिता की आग कभी ठंडी नहीं होती है। क्योंकि यहां हर वक्त कोई न कोई चिता जल रही होती है। माना जाता है कि जिस दिन मर्णिकर्णिका घाट पर एक भी चिता नहीं जलेगी वह प्रलय का दिन होगा। अब सवाल उठता है कि चिता के बीच ये नाच-गाना किसलिए? क्यों इंसान को मरने के बाद भी चिता पर सुकून मयस्सर नहीं होने दिया जा रहा है? क्यों कुछ लड़कियां श्मसान में चिताओं के करीब नाच रही हैं? आखिर कौन हैं यह लड़कियां? जी हां यह सब उसी मणिकर्णिका घाट पर होता है जो सदियों से मौत और मोक्ष का साक्षी रहा है। इसी घाट पर सजती है मस्ती में मदहोश और चैंका देने वाली महफिल। एक ऐसी महफिल जो जितना डराती है, उससे कहीं ज्यादा हैरान करती है।
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